भारतीय ज्योतिष में ग्रहों और नक्षत्रों का गहरा महत्व माना गया है। व्यक्ति के जीवन की सुख-सुविधाएँ, सफलता, असफलता, स्वास्थ्य और पारिवारिक परिस्थितियाँ उसकी जन्मकुंडली में स्थित ग्रहों की स्थिति पर निर्भर करती हैं। इन्हीं योगों में से एक है कालसर्प योग। यह योग तब बनता है जब व्यक्ति की कुंडली में सभी ग्रह राहु और केतु के बीच आ जाते हैं। ऐसा योग जीवन में अनेक प्रकार की कठिनाइयाँ, बाधाएँ और मानसिक तनाव लेकर आता है।
कालसर्प योग से प्रभावित जातक को जीवन में कई उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ता है। इस योग की शांति के लिए कालसर्प योग शांति पूजा विशेष रूप से की जाती है। यह पूजा त्र्यंबकेश्वर, नासिक (महाराष्ट्र) में सर्वाधिक प्रभावी मानी जाती है।

कालसर्प योग के लक्षण
कालसर्प योग होने पर व्यक्ति को निम्नलिखित समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है –
बार-बार असफलता का सामना करना।
नौकरी या व्यापार में रुकावटें।
मानसिक तनाव और अवसाद।
संतान सुख में बाधा।
दांपत्य जीवन में अशांति।अनिद्रा और स्वास्थ्य संबंधी परेशानी।
अचानक शत्रु या कानूनी विवाद।
कालसर्प योग के प्रकार
कालसर्प योग कई प्रकार का होता है। जैसे –
अनंत कालसर्प योग
कुलिक कालसर्प योग
वासुकी कालसर्प योग
शंखपाल कालसर्प योग
पद्म कालसर्प योग
महापद्म कालसर्प योग
तक्षक कालसर्प योग
कार्कोटक कालसर्प योग
शंखचूड़ कालसर्प योग
पातक कालसर्प योग
विषधर कालसर्प योग
शेष नाग कालसर्प योग
हर प्रकार का योग व्यक्ति के जीवन में अलग-अलग प्रभाव डालता है, परंतु सभी के निवारण के लिए पूजा अनिवार्य मानी जाती है।
कालसर्प योग शांति पूजा का महत्व
त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग पर यह पूजा करने का विशेष महत्व है। शास्त्रों के अनुसार यहाँ की गई पूजा शीघ्र फलदायी होती है। इस पूजा के द्वारा –
पितृदोष और कालसर्प योग दोनों की शांति होती है।
जीवन में बाधाएँ धीरे-धीरे दूर होती हैं।
मानसिक शांति और स्थिरता प्राप्त होती है।
परिवार में सुख-समृद्धि आती है।
करियर और व्यापार में प्रगति मिलती है।
कालसर्प योग शांति पूजा की विधि
स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करें।
त्र्यंबकेश्वर मंदिर में शिवलिंग पर जलाभिषेक करें।
पूजा का प्रारंभ गणेश जी की आराधना से करें।
इसके बाद राहु-केतु, नागदेवता और भगवान शिव का विशेष पूजन करें।
कालसर्प योग शांति मंत्रों का जाप किया जाता है।
ब्राह्मणों को दक्षिणा और अन्नदान दिया जाता है।
पूजा में विशेष रूप से रुद्राभिषेक और नागबलि विधि का भी महत्व है।
कालसर्प योग शांति के लाभ
मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है।
पारिवारिक कलह समाप्त होती है।
आर्थिक उन्नति और व्यापार में लाभ।
संतान सुख प्राप्त होता है।
नौकरी और करियर में सफलता।
स्वास्थ्य लाभ और आयु में वृद्धि।
कालसर्प योग से बचने के लिए उपाय
प्रतिदिन शिवलिंग पर जल चढ़ाएँ।
महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें।
मंगलवार और शनिवार को हनुमान जी की पूजा करें।
कालभैरव और नागदेवता की आराधना करें।
पितरों का तर्पण करें।
निष्कर्ष
कालसर्प योग जीवन में अनेक कठिनाइयों का कारण बनता है, लेकिन उचित पूजा और उपाय से इसके दुष्प्रभाव को दूर किया जा सकता है। त्र्यंबकेश्वर में कालसर्प योग शांति पूजा करना अत्यंत शुभ माना गया है। यहाँ अनुभवी और विद्वान पंडित इस पूजा को विधिवत सम्पन्न कराते हैं।
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लेखक: शिवेंद्र गुरु जी
सटीक और प्रामाणिक पूजा के लिए, शिवेंद्र गुरु जी त्र्यंबकेश्वर में काल सर्प पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ पंडित हैं। वर्षों के अनुभव और बेजोड़ आध्यात्मिक अनुशासन के साथ, वे सुनिश्चित करते हैं कि प्रत्येक अनुष्ठान सटीकता, पवित्रता और दिव्य ऊर्जा के साथ किया जाए।
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कालसर्प योग शांति से जुड़े सामान्य प्रश्न
कालसर्प योग कब बनता है?
जब जन्मकुंडली में सभी ग्रह राहु और केतु के बीच आ जाते हैं तब कालसर्प योग बनता है।
क्या कालसर्प योग हमेशा अशुभ होता है?
यह योग कई परेशानियाँ लाता है, लेकिन सही पूजा और उपाय करने से इसके प्रभाव को कम किया जा सकता है।
कालसर्प योग शांति पूजा कहाँ करनी चाहिए?
त्र्यंबकेश्वर (नासिक, महाराष्ट्र) को इस पूजा के लिए सबसे उत्तम स्थान माना गया है।
पूजा करने का सही समय कौन सा है?
नाग पंचमी, श्रावण मास और अमावस्या तिथि पर यह पूजा विशेष फलदायी होती है।
क्या कालसर्प योग शांति पूजा एक ही बार पर्याप्त है?
हाँ, विद्वान पंडित द्वारा विधिवत की गई एक बार की पूजा आजीवन प्रभावी होती है।
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