हिंदू धर्म और आध्यात्मिक परंपरा में रुद्राक्ष का बहुत महत्व है। “रुद्र” का शाब्दिक अर्थ भगवान शिव और “अक्ष” का शाब्दिक अर्थ आँसू है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब भगवान शिव ने गहन तपस्या और ध्यान के साथ अपनी आँखें खोली, तभी उनके आँसुओं से रुद्राक्ष का निर्माण हुआ। यही कारण है जिसे को शिव का आशीर्वाद माना जाता है।
रुद्राक्ष धारण करने पर मानसिक शांति, स्वास्थ्य, आध्यात्मिक उन्नति और नकारात्वपूर्ण ऊर्जा से सुरक्षा प्राप्त होती है। रुद्राक्ष सबसे अधिक नेपाल और भारत में मिलते हैं। इसमें बहुत सारे प्रकार होते हैं, जिन्हें मुखियों पर आधारित किया जाता है।

रुद्राक्ष के प्रकार और उनके लाभ
1. एकमुखी रुद्राक्ष
- यह रुद्राक्ष सबसे अधिक दुर्लभ और शक्तिशाली माना जाता है।
- इसे धारण करने से आत्मज्ञान, आध्यात्मिक जागरण और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
- अन्य रूपों में मौजूद साधकों और योगियों के अलावा भी लाभकारी।
2. द्विमुखी रुद्राक्ष
- यह प्रेम, सामंजस्य और वैवाहिक जीवन में सुख प्रदान करता है।
- पति-पत्नी के संबंधों को मजबूत करता है।
3. त्रिमुखी रुद्राक्ष
- यह अग्नि देव का प्रतीक है।
- इसे धारण करने से पाप कर्मों का नाश और साहस की वृद्धि होती है।
4. चतुर्मुखी रुद्राक्ष
- यह ब्रह्मा का प्रतीक है।
- शिक्षा, ज्ञान और वाणी में प्रखरता लाता है।
5. पंचमुखी रुद्राक्ष
- यह सबसे आम और व्यापक रूप से धारण किया जाने वाला रुद्राक्ष है। मानसिक शांति, स्वास्थ्य और पापों से मुक्ति देता है।
6. षष्ठमुखी रुद्राक्ष
- कार्तिकेय का प्रतीक माना जाता है। बुद्धि, स्थिरता और साहस प्रदान करता है।
7. सप्तमुखी रुद्राक्ष
- यह लक्ष्मी का प्रतीक है। इसे धारण करने से धन, वैभव और समृद्धि आती है।
8. अष्टमुखी रुद्राक्ष
- गणेश का प्रतीक।
- बाधाओं का नाश करता है और सफलता प्रदान करता है।
9. नवमुखी रुद्राक्ष
- दुर्गा शक्ति का प्रतीक है।
- धारण करने से भय दूर होता है और आत्मविश्वास बढ़ता है।
10. दशमुखी रुद्राक्ष
- यमराज और विष्णु का प्रतीक।
- नकारात्मक शक्तियों और शत्रुओं से बचाता है।
11. ग्यारहमुखी रुद्राक्ष
- हनुमान जी का प्रतीक।
- साहस, बल और निर्भयता देता है।
12. बारहमुखी रुद्राक्ष
- सूर्य देव का प्रतीक।
- इसे धारण करने से तेज, आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता प्राप्त होती है।
13. तेरहमुखी रुद्राक्ष
- यह कामदेव और इंद्र का प्रतीक है।
- भौतिक सुख और आकर्षण शक्ति प्रदान करता है।
14. चौदहमुखी रुद्राक्ष
- यह शिवजी का नेत्र माना जाता है।
- इसे धारण करने से भविष्यदृष्टि और विशेष आध्यात्मिक शक्तियाँ प्राप्त होती हैं।
15. पंद्रहमुखी रुद्राक्ष
- पाप कर्मों का नाश करता है।
- सौभाग्य और संतुष्टि लाता है।
16. सोलहमुखी रुद्राक्ष
- इसे विजय का प्रतीक माना जाता है।
- न्यायिक मामलों और प्रतियोगिताओं में सफलता दिलाता है।
17. सत्रहमुखी रुद्राक्ष
- यह काल भैरव और विष्णु का प्रतीक है।
- नकारात्मक शक्तियों से बचाता है।
18. अठारहमुखी रुद्राक्ष
- इसको धरती माता का प्रतीक घोषित किया जाता है।
- देता है धन, समृद्धि और उन्नति।
19. उन्नीसमुखी रुद्राक्ष
- यह सूर्यनारायण का प्रतिक है।
- धारण करने पर जीवन में सुख-शांति और ऊर्जा प्राप्त होती है।
20. बीसमुखी रुद्राक्ष
- यह दुर्लभ और प्रभावशाली रुद्राक्ष है।
- धारण करने पर आध्यात्मिक और सांसारिक दोनों आशीर्वाद प्राप्त होते हैं।
21. गौरी शंकर रुद्राक्ष
- इसमें दो रुद्राक्ष एक साथ मिले होते हैं।
- दांपत्य सुख और परिवार में सामंजस्य लाता है।
22. गणेश रुद्राक्ष
- इसमें ऊपर की ओर एक विशेष आकृति होती है।
- जीवन से बाधाएँ दूर करता है।
रुद्राक्ष धारण करने के नियम
- रुद्राक्ष हमेशा सोमवार या शुभ मुहूर्त में धारण करना चाहिए।
- इसे धारण करने से पहले गंगाजल और दूध से शुद्ध करें।
- भगवान शिव के मंत्रों का जाप करके ही पहनें।
- इसे सदैव शुद्ध और पवित्र रखें।
निष्कर्ष
रुद्राक्ष भगवान शिव की कृपा है, जो जीवन में सुख-शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक वृद्धि लाता है। इसके कई रूप अलग-अलग लाभ देते हैं। सही रुद्राक्ष चुनने और नियमों के अनुसार धारण करने से व्यक्ति अपने जीवन की कई समस्याओं से राहत पा सकता है।
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रुद्राक्ष के प्रकार से जुड़े सामान्य प्रश्न
रुद्राक्ष किसे धारण करना चाहिए?
रुद्राक्ष हर कोई धारण कर सकता है, चाहे वह गृहस्थ हो या साधक।
क्या रुद्राक्ष पहनने से नकारात्मक असर हो सकता है?
यदि इसे शुद्धता और नियमों के साथ धारण किया जाए तो कोई नकारात्मक असर नहीं होता।
सबसे शक्तिशाली रुद्राक्ष कौन सा है?
एकमुखी रुद्राक्ष को सबसे शक्तिशाली और दुर्लभ कहा जाता है।
रुद्राक्ष रोज़ पहन सकते हैं?
हाँ, इसे नियमित रूप से धारण किया जा सकता है, बस शुद्धता का ध्यान रखें।
रुद्राक्ष कहाँ से खरीदना चाहिए?
केवल विश्वसनीय और प्रमाणित स्थान से ही रुद्राक्ष खरीदना चाहिए।
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